Thursday, November 19, 2020
झाँसी की महारानी
Tuesday, November 10, 2020
कोरोना काल में मजदूर
मुक्तक
1-प्रेम तुमको भी है हमको ज्ञात हो रहा।।
स्नेह तन मन में अब मेरे व्याप्त हो रहा।।
नेह में हम तुम्हारे पिघलने लगे।।
प्रेम गहरा सा अब मुझको प्राप्त हो रहा।।
2-तुमने छुआ है जबसे खुद को भुला दिया।।
तेरी खुशबुओं में खुद को मिला दिया।।
अब मर भी जाऊं तो कोई गिला नही है।।
तेरी धड़कनों में खुद को जिला दिया।।
💞मधु शुभम पाण्डे💞
कृष्णा भजन
भजन
भव से तारो हमें ओ कन्हैया,तेरे दर के पुजारी हुए है।।
भीख देदो प्रभु जी दरस की,दर्शन के भिखारी हुए है।।
1-हम है अज्ञानी,है छल प्रपंची,तुम हो सर्वज्ञ मेरे प्रभु जी।।
उलझे है मोह माया में इतने,हम गुनहगार तेरे प्रभु जी।।
विनय करते है कर जोड़ मोहन,जबसे सूरत निहारे हुए है।।
भीख दर्शन•••••••••••
2-उम्र मैने व्यसन में गुजारी, अंत में भी है माया निहारी,
अनगिनत पाप मैने है कीन्हे,न कभी पुण्य कीन्हे मुरारी,
अब बिसारो प्रभु मेरे अवगुण,अब तो तेरे सहारे हुए है।।
भीख••••••••••••••
3-करूँ हरिगान हर पल प्रभु मैं, ज्ञान चक्षु मुझे दो बिहारी,
रात दिन भक्तिरत ही रहूं मैं, ऐसी कृपा करो पालनहारी,
मेरे हृदय भक्ति जगा दो,दुनिया के सताए हुए है,
भीख••••••••••••
पिछड़ती संस्कृति
#पिछड़ती संस्कृति बिछड़ते संस्कार✍️
आज के भौतिकवादी युग में युवा पीढ़ी आधुनिकता की ओर आकर्षित हो रही है।
हमारी संस्कृति विलुप्त होती प्रतीत हो रही है।
भौतिक सुविधाओं ने जहां हमारा काम आसान किया है।
वहीं दूसरी ओर हमसे बहुत कुछ छीन भी लिया हैं।
भारतीय संस्कृति और संस्कार वर्तमान समय में पिछड़ते जा रहे हैं।
प्रतिस्पर्धा के इस युग में आज आगे निकलने की होड़ लगी हुई है।
जिससे युवाओं के भविष्य में विक्षोभ उत्पन्न होता दिखाई पड़ रहा है।
बदलती मानसिकता और परिवेश ने संस्कृति को अस्त व्यस्त कर दिया है।
जहाँ हमारा देश सदियों से अपनी अनूठी संस्कृति के लिए विश्व पटल पर माना जाता है। वहीं आज हम इस मामले में पिछड़ते जा रहे हैं।
भारतीय संस्कृति में आये अहितकारी बदलाव इसके संकेत देते हैं।
लोग पुरानी परम्पराओं को भुला कर नए रिवाजों को चलन में ला रहे हैं।जो हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए घातक हैं।
अनेकता में एकता के लिए विश्व विख्यात भारत आज धर्म के नाम पर विभाजित होता दिखाई पड़ रहा है।
हमारी एकता बिखरती जा रही है।
सिनेमा समाज का दर्पण होता है,ये बात आज स्प्ष्ट होती जा रही है।
पश्चिमी सभ्यता के प्रचलन में हम हमारी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं।
हमारी युवा पीढ़ी पश्चिमी सभ्यता और सिनेमा को अपना आदर्श मान रही है।
निजी जीवन से लेकर विद्यालयों तक वही लाइफस्टाइल चल रहा है,जो सिनेमा जगत में चल रहा है।युवाओं का छुट्टी के बाद दोस्तों के साथ सड़कों पर गाड़ियों को दौड़ाना ,कहीं धूम्रपान करना ,अपशब्दों का प्रयोग करना ,अंग्रेजी भाषा और सभ्यता को ज्यादा महत्व देना।
कभी कभी देखने को मिलता है जब परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त होते हैं, तो आजकल के युवाओं की महफिलें सजती हैं जिसमें अंग्रेजी बोतलों का सहारा लिया जाता है। कम अंक आने पर भी दोस्तों का टोली बनाकर फिर उन्ही बोतलों के साथ सांत्वना देना।
पढ़ते पढ़ते छात्रों के जीवन में एक समय आता है।
जब वो कर्ज़दार हो जाते हैं।
पैसों के लेनदेन की वजह से गलत रास्तों को अपनाते हैं और एक दिन वो आता है जब कम उम्र में ही बड़े अपराधी बन जाते हैं।
गलत आदतों में लिप्त रहकर उनका मानसिक विकास नही हो पाता और फिर माता पिता का नाम रोशन करने के बजाय उन्हें दुःखी करते हैं।
"वसुधैव कुटुम्बकम" का भाव सदैव से भारतीय समाज का आधार माना गया है।समाज ने पूरी वसुधा को अपने परिवार की तरह माना है। समाज की बात तो छोड़ो आज तो सामूहिक परिवार भी कलह व्याप्त हैं।
परिवारों की एकता आज खत्म होती जा रही है। हम अपनी परम्पराओं और संस्कृति को भूलते जा रहे हैं।
हमें आज आवश्यकता है अपने बच्चों को हमारी संस्कृति के बारे में बताया जाए।उन्हें परम्पराओं और धर्म से जोड़ा जाए।
धार्मिक स्थलों में ले जाया जाए।धार्मिक कार्यों में शामिल किया जाए। अपनी मातृभाषा को महत्व देना सिखाएं। सभी भाषाओं का ज्ञान होना आवश्यक है,परन्तु मातृभाषा को विशेष दर्जा दिया जाए धर्म के प्रति सजग किया जाए।
अख़बार ,टीवी,इंटरनेट की यह जिम्मेदारी बनती है कि हमारी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा दें।
बॉलीवुड ने आज हमारी संस्कृति से हमें कोसों दूर कर दिया है।
बॉलीवुड से दूर अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति और सांस्कृतिक नृत्य,सांस्कृतिक कार्यक्रम दिखाए , ज्ञान और शिक्षाप्रद पुस्तकें पढ़ायें ज्यादा से ज्यादा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ले जाएं।
स्कूलों और कॉलेजों में भी हमारी भाषा और धर्म के बारे में बताया जाए शिक्षक और शिक्षा का सही महत्व समझाया जाए।
हमें पहनावे पर भी ध्यान देना होगा हमारे त्योहारों पर हमें भारतीय परिधान पहनने चाहिए।
भारतीय भोजन का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहेगा ।
जितना हो सके ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाएं बच्चों को भी पर्यावरण को शुद्ध रखने के सुझाव दे।
घर पर सब्जियों को उगाएँ।बच्चों को परिवार के साथ समय बिताने के लिए कहें जब आप परिवार में रहेंगे तभी अपने संस्कारों को जान पाएंगे। भारतीय खेलों को महत्व दें उनके साथ खेलें जिससे आपका और बच्चों दोनो का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।
कभी कभी छोटी सी बीमारियों में हमारे नुस्खे भी आजमाएं। योग करें।
त्यौहार परिवार के साथ मिलकर मनाएं। बच्चों को बुजुर्गों के पास रखें तभी अपनी परम्पराओं की जानकारी मिलेगी।।
प्रकृति और संस्कृति दोनो को बनाये रखें।।
मधु शुभम पाण्डे✍️
रामजन्म भूमि पूजन
भजन
अयोध्या नगरी में हो रही आज दिवाली,
झुमों नाचो गाओ सब मिल और बजाओ ताली,
लगता है वर्षों की तपस्या पूर्ण आज हुई है।।
दुल्हन की जैसी है अयोध्या नगरी सजी हुई है।।
लगती है अयोध्या नगरी जैसे उमर हो बाली,
अयोध्या नगरी••••••••
सारे विश्व मे रामलला का अब परचम फहराएगा।।
हर घर का अब बच्चा बच्चा राम नाम गुण गायेगा।।
चारों ओर भक्ति की रोशनी छुप गई रतिया काली।।
अयोध्या नगरी में••••••
पतिदेव
मेरे जीवन साथी मेरी दुनिया
♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️
मैं अपूर्ण थी, तुमने मुझे पूर्ण कर दिया।।
अपना बनाके,मुझे नया संसार दे दिया ।।
जीवन को मेरे ,खुशियों का हार दे दिया।।
बेनूर जिंदगी को ,तुमने नूर दे दिया।।
बिन कहे मेरी सारी बात समझ जाते हो।।
गलती करदूँ फिर भी हंसकर समझाते हो।।
तुम्ही मेरा सर्वस्व ,तुमसे मेरी पहचान है।।
तुम्ही मेरी दुनिया, तुमसे ही मेरी शान है।।
जनम जनम अब तो हमें साथ रहना है।।
कदम कदम अब तो हमें साथ चलना है।।
जो कभी रूठ जाऊं तो मुझको मना लेना।।
नासमझ हूँ, बेअक्ल हूँ बस माफ् कर देना।।
मिलके साथ ,हम अपनी दुनिया सज़ा लेंगे।।
प्रेम से हम सबको ,मिलके रहना सिखा देंगे।।
नित भाव से, हम साँवरे की सेवा करेंगे।।
सारी विपत्तियों को, मुरली वाले हरेंगे।।
आप जैसा साथी पाकर में सचमे बहुत खुश हूँ।। आपके लिए कितना लिखूं शब्द ही नही बस इतना ही कहूंगी जो लाखो करोड़ो में एक होता है।। वो मुझे मिल गया।।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
लोह पुरुष
लोह पुरुष-
देशभक्ति जिसकी रग रग में जगी थी।।
एकीकरण की मन में आस लगी थी।।
यथार्थ कर दिया तुमने, एकता का स्वपन।।
लोह पुरुष तुमको मेरा शत शत नमन।।
निर्भीक, धर्मवीर,ईमानदारी का भाव था।।
सिंह सी गर्जना थी,पर सरल स्वभाव था।।
किसानों के हक़ में किया जीवन यापन।।
लोह पुरुष तुमको मेरा शत शत नमन।।
आज़ादी के सेनानी,तुम गरीबों के सरदार थे।।
दुश्मन की कूटनीति पर करते तुम वार थे।।
नड़ियाद के वीर तुम हो भारतरतन।।
लोह पुरुष तुमको मेरा शत शत नमन।।
182मीटर "स्टेच्यू ऑफ यूनिटी" है।।
एकता की मूर्ति की अलग ही छवि है।।
साहित्य की ओर भी दिया तुमने अपना मन।।
लोह पुरुष तुमको मेरा शत शत नमन।।
मधु शुभम पाण्डे✍️
शहीदों को नमन
🙏🏻शहीदों को शत शत नमन🙏🏻
करके न्यौछावर प्राणों को,हँसते हँसते जग छोड़ गए।।
रहे देश सलामत यही सोच परिवार को रोता छोड़ गए।।
उनके भी घर बीबी, बच्चे, माँ, बाप, भाई, बहन होते है।।
हमसे गर कोई दूर हो जाये तो हम बिलख बिलख कर रोते है।।
सूनी हो गयी कई गोदें , कइयों की माँगे उजड़ गयी।।
हम सोते रहे बेखौफ घरों में, वो दुनियां से मुख मोड़ गए।।
इक बार हृदय को खोल जरा सोचो उन हीरों के बारे मे।।
बलिदान हो गए भारत माँ पर और चमक देश मे छोड़ गए।।
मत करो भेद,मत लड़ो, देश को फिर से स्वर्ण का होने दो।।
करो गर्व भारतीय होने का और भारत को विकसित होने दो।।
मधु शुभम पाण्डे
माननीय नरेन्द्र मोदी जी कोरोना काल में
सम्"मा"न हुआ है आज देश में ।।
संस्कृति और भारत माँ का।।
म"न" बाग बाग हो गया देख खिल उठा है मन प्रकृति का।।
"नी"रस से इस देश मे घंटे घड़ियाल फिर बाज उठे।।
"य"श कीर्ति सदा फैले मोदी की जन जन के दिल यह बोल उठे।।
"न"ही डरो "कोरोना" से तुम सब बस देश का साथ मिल देते रहो।।
सा"रे" परिवारों को एक साथ मिल जीना आज सिखाया है।।
इ"न्द्र" बन आज कर प्रेम बर्षा सबके मन को हरषाया है।।
"मो"हित हुई देख आज श्रष्टि संकट से बचना सिखलाया है।।
"दी"नो के दीनानाथ बने डॉक्टर, जवानों का भी मान बढ़ाया है।।
"जी"वन हुआ धन्य देश भर का मोदी जी से पीएम पाया है।।
"मधु" शब्दो से मोदी जी की गाथा को मैने गाया है।।
विह्वल हो उठे हृदय सबके तन झूम उठा धरती माँ का।।
सम्मान हुआ है आज देश मे संस्कृति और भारत माँ का।।
मधु शुभम पाण्डे
संतों की हत्या
संतो की नृशंस हत्या
सतयुग त्रेता द्वापर युग से इस युग मैं भी अब असुर हुए।।
पाप बढ रहा फिर धरती पर आ जाओ प्रभु धनुष लिए।।
1- न धर्म रहा न सत्य रहा, कलयुग की अब क्या बात कहे।।
है साधु संत अब नही सुरक्षित, मानव को सब असुर कहे।।
नही रहा जगत रहने लायक, छल कपट ने पाँव पसार दिए।।
पाप बढ रहा फिर धरती पर आ जाओ प्रभु धनुष लिए।।
2-संत गौ माता की हत्या, इंसानी असुरो की करनी है।।
डगमगा रहा है विश्व आज, कांप रही यह धरनी है।।
भव सागर मैं डोले नैया, संसार मे अब अन्याय जिये।।
पाप बढ़ रहा फिर धरती पर आ जाओ प्रभु धनुष लिए।।
3-तरकस से निकालो न्याय प्रभु, अब दुष्टो का संहार करो।।
जीवित करदो मानवता को,धरती मां का सब भार हरो।।
"मधु" हृदय रोये, हुए सजल नयन, बस एक आप की आस किए।।
पाप बढ़ रहा फिर धरती पर आ जाओ प्रभु धनुष लिए।।
मधु शुभम पाण्डे
स्त्री
💐 स्त्री 💐
एक स्त्री होना बिल्कुल आसान नही होता।।
इसके जैसा जग में कोई, धैर्यवान नही होता।।
जन्म से ही वो,बन्दिशों में जीती है।।
दोनों कुल की मर्यादा, और निभाती सारी रीती है।।
लाखो अरमान दफन दिल में, जब ससुराल आती है।।
आवाज़ उठा दे गर अपनी, हर पल ठुकराई जाती है।।
सहती हर पल,हँसती हर पल, मुख मण्डल पर दुःख का निशान नही होता।।
एक स्त्री होना बिल्कुल आसान नही होता।।
माँ, बहन,पत्नी, बेटी,के रूप में,जिम्मेदारी निभाती है।।
जिंदगी के रंगमंच पर , कितने किरदार निभाती है।।
ख्वाहिशों को छुपाकर दिल में, शिकवों का कोई निशान नही होता।।
एक स्त्री होना बिल्कुल आसान नही होता।।
प्रेम , त्याग, ममता,सौंदर्य, सभी गुणों की खान है।।
तुलना कम मत समझो इसकी, पुरुषों की स्त्री से पहचान है।।
परिस्थिति से लड़ती हर दम, और अधरों पे मुस्कान है।।
सृष्टि की सुंदर रचना है स्त्री, ये जग में सबसे महान है।।
देवता भी नही बसते जहाँ स्त्री का सम्मान नही होता।।
यूँ स्त्री होना बिल्कुल आसान नही होता।।
मधु शुभम पाण्डे🙏🏻
Monday, November 9, 2020
दीपोत्सव
दीपोत्सव🪔
अंतःकरण में ज्योति जलाकर,घृणा द्वेष को दूर भगायें।।
प्रेम नाम की बाती डालकर,आओ सब दीवाली मनायें।।
हृदय से ईर्ष्या ऐसे निकालो जैसे घर से कूड़ा करकट।।
मन में इंसानियत जगाओ,हो जाये फिर घर में बरक़त।।
महल,अटारी,द्वार सजायें।।
आओ सब दीवाली मनायें।।
हर बेटी को लक्ष्मी समझो,वही तो सबकी दौलत है।।
झूठी शान पैसे से होती ये न सच्ची शौहरत है।।
दिलों में प्रेम के दीप जलायें।।
आओ सब दीवाली मनायें।।
माँ बेटी की आन बचाना,सबकी जिम्मेदारी है।।
लक्ष्मी मां आशीष दे सबको,ऐसी विनय हमारी है।।
आओ अब मानवता दिखायें।।
आओ सब दीवाली मनायें।।
अब न कोई निर्भया मरे,न किसी मासूम की माँ रोवे।।
करे कृत्य जो इतना घिनौना,सज़ा उसे फाँसी की होवे।।
कानून को अब कुछ तगड़ा बनायें।।
आओ सब दीवाली मनायें।।
मधु शुभम पाण्डे✍️✍️
श्रद्धांजलि
अश्रुपूरित श्रद्धांजलि🙏🙏💐😥
माँ मैं इस दीवाली आऊंगा,
नही पता था उस माँ को देश पे न्यौछावर जाएगा,
दीवाली पर कुलदीपक उसका, तिरंगे में लिपटा आएगा।
कहता था मां से अपनी आकर फिर न जाऊंगा।।
माँ मैं इस दीवाली आऊंगा।।
उस माँ की दीवाली कैसे हो जिसका कुलदीपक न आयेगा।।
पाक तुझे इस करनी पर अब बख्शा न जायेगा।।
हर जन्म में माँ भारती तुझसे नेह निभाऊंगा।।
माँ मैं इस दीवाली आऊंगा।।
दिल में भारत माँ सिर पर तिरंगा यही जीवन आधार है।।
सैनिक का देश ही घर है देश ही परिवार है।।
हर जन्म भारत देश भारत भूमि ही चाहूंगा।।
माँ मैं इस दीवाली आऊंगा।।
विशाल हृदय के मां पिता तुम्हारे सैनिक तुम्हे शत शत नमन।।
तुमसे ही है देश सुरक्षित और भारती माँ का दामन।।
सरहद के लिए लड़ते लड़ते हर बार प्राण गवाऊंगा।।
माँ मैं इस दीवाली आऊंगा।।
मधु शुभम पाण्डे🙏
Saturday, November 7, 2020
हाथरस घटना
😭😭😭😭
डरती है एक बेटी की माँ ,पैदा बेटी करने से।
हवस के भूखे हैवानों के, हाथ कुचलकर मरने से।
नन्ही नन्ही कलियों को, खिलने से पहले मसल दिए।
क्या दोष है नन्ही परियों का, जिनको पत्थर से कुचल दिए।
नौ महीने जिसने पेट में ढोया, वो बिलख बिलख कर रोती है।
छीन ली उसकी घर की रौनक, क्या बेटी इसलिए होती है।
मत ढोंग करो उसे दुर्गा मानकर, देवी पूजा करने का।
बस हक़ देदो उसे इस दुनियां में, निर्भय होकर जीने का।
मधु शुभम पाण्डे✍️
प्रधानमंत्री
यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं ठाकुर जी आपको स्वस्थ, निरोगी और दीर्घायु करें💐💐💐
"यु"गों युगों तक गायी जायेगी, महिमा मोदी नाम की।।
"ग"र न होते घबरा जाती , जनता हिंदुस्तान की।।
अ"के"ले लड़ते परिस्थितियों से, बन ""पिता"" धैर्य बंधाते हो।।
हाथ पकड़ चलते जनता का,सबका साथ निभाते हो।।
"म"हामारी"" से था विश्व व्यथित,तुमने ""लॉकडाउन""कराया।।
परिचय दे बुद्धिमत्ता का, ""कोरोना"" से लड़ना सिखाया।।
"हा"थ बढ़ा तुमने मुस्लिम, बहनों को न्याय दिलाया।।
""तीन तलाक"" हटा उनको, सम्मान से जीना सिखाया।।
"ना"काम नीतियों को दे चकमा,धैर्य से काम बनाते।।
देश विदेश में बढ़ा मित्रता, भारत का परचम लहराते।।
ए"य"र स्ट्राइक"" करवा पुलवामा, शहीदों का मान बढ़ाया है।।
""अनुच्छेद 370"" हटा,जम्मू को आजाद कराया है ।।
"क"बसे बैठे थे ""रामलला"", उनको जन्मस्थान दिलाया।।
भगवान के दूत हो तुम मोदी, सबको एहसास कराया।।
"न"मन तुम्हे मोदी जी ,नमन तेरी जननी मां को।।
ऐसा तपस्वी पुत्र दिया, तुमने जो भारत माँ को।।
सा"रे" भारत को रोशन कर , एकता की मिसाल बनाई ।।
संकट की घड़ी को भूल सबने, अप्रैल में दीवाली मनाई ।।
नरें"द्र" हो तुम जनता के, भारत भी स्वर्ग समान है।।
रहे सदा मोदी जननायक, ये भारत का अभिमान है।।
"मो"हक छवि है मोदी की, श्री राम के आदर्शों पर चलते।।
है त्याग तपस्या सब तुममे, दिन रात देश पर तुम मरते।।
"दी"पक बन करो उजाला तुम,हम बुराइयों के तिमिर मिटा देगे।।
हम भाई चारे से भारत को, सोने की चिड़िया बना देंगे।।
"जी"त गया अब है भारत, दुनिया ने भी यह मान लिया।।
विश्व विजयी कहलायेंगे फिर, अब हम सबने ठान लिया।।
""मधु"शब्द नही शब्दकोश में, महिमा गाये तेरे काम की।।
युगों युगों तक गायी जायेगी, महिमा मोदी नाम की।।
मधु शुभम पांडे✍️✍️
कागज़ क़लम
# कागज़ क़लम
जब क़लम चलती है शब्दों का भंडार उमड़ता है
और फिर प्रेम,वेदना,स्नेह,और न जाने कितनी अनकही बातें ,
किसी के हृदय की असीमित पीड़ा
तो किसी का उमड़ता बेहिसाब प्रेम
सब उकेर देती है कोरे कागज़ पर
कागज़ के बिना क़लम अधूरी है और क़लम के बिना कागज़
कितना अटूट रिश्ता है कागज़ और क़लम का
बस ऐसे ही रिश्ते की तलाश होती है सभी को
जो एक दूसरे के बिना अपूर्ण हो
मधु शुभम पाण्डे✍️✍️
मौन
#मौन
मिलती नही हो तुम्हारी, जब किसी से विचारधारा।।
सामने उसके तुम्हारा,बस मौन रहना ठीक है।।
समझी न जाये तुम्हारी बातों की जहां अहमियत।।
उस जगह पर तुम्हारा,बस मौन रहना ठीक है।।
समझ रहे हो तुम भी गर चल रही हैं साज़िशें।।
सही समय की प्रतीक्षा कर,बस मौन रहना ठीक है।।
जुबां पर तुम्हारी भी लाखों शब्द होंगे।।
रिश्तों की लाज़ रखकर बस मौन रहना ठीक है।।
चाहते हो गर तुम,मुट्ठी में करना ये जहाँ।।
कोशिश जी तोड़ कर, बस मौन रहना ठीक है।।
मधु शुभम पाण्डे✍️✍️
मेरी लाडो
💞मेरी लाड़ो💞
फूल सी नाज़ुक ,चांद सी उजली मेरी प्यारी गुड़िया हो।।
तुम्हें देख चेहरा खिल जाता,तुम जादू की पुड़िया हो।।
नन्ही परी आयी जबसे,घर में खुशहाली छायी है।।
बेटी के रूप में मेरे घर,लक्ष्मी मैया ही आयी हैं।।
तू राजकुमारी हमारी है,सबके नैनों का तारा है।।
नित नए मुकाम पाना लाड़ो,दिल से आशीष हमारा है।।
मधु शुभम पाण्डे✍️
संकल्प
#संकल्प
आओ हम संकल्प ले
अपने देश को फिर सोने की चिड़िया बनायेगे।।
फिर से एक नया भारत बनायेगे।।
न द्वेष हो न क्लेश हो।।
हर बेटी में भारत माँ का भेष हो।।
बेटियो को सम्मान दिलाएगें।।
फिर से एक नया भारत बनायेगे।।
हर बेटी अब जिए शान से।
गर्व हो उसे इस धरती इस जहान से।।
ऐसा हिंदुस्तान बनायेगे।।
फिर से एक नया भारत बनायेगे।।
सब भाई चारे से रहे
न किसी में कोई भेद भाव हो।।
ये देश परिवार लगे सबका ऐसा भाव हो।।
हम फिर से भाईचारा निभायेंगे।।
फिर से एक नया भारत बनायेंगे।।
सैनिकों का बलिदान अब नही होने देंगे।।
भारत माँ की आन को हम कभी नही खोने देंगे।।
दुश्मन का सर हम मिलकर झुकायेंगे।।
फिर से एक नया भारत बनायेंगे।।
संस्कारों को हम खोने नही देंगे।।
देशभक्ति दिल में कम होने नही देंगे।।
हम सब मिलकर अपनी संस्कृति को बचायेंगे
फिर से एक नया भारत बनायेगे।।
मधु शुभम पाण्डे
बारिश
बारिश
देखो बरखा रानी आयी,गूँज उठी है शहनाई।।
नभ में काले मेघा छाये, धरती ने ली है अंगड़ाई।।
बूंदों की सरगोशी से ,मिट्टी सोंधी सी महक रही।।
फैली खुशहाली चारों ओर, पेड़ों पर चिड़िया चहक रही।।
सड़कें, राही, पेड़, परिंदे,गर्मी से बेहाल थे सब।।
फूलों की मुस्कान है लौटी,वर्षा के इंतज़ार में थे सब।।
आँगन के पानी में बच्चे, कागज की नाव चलाते है।।
पुए-पकौड़े खा खाकर,अन्नदाता खुशी मनाते हैं।।
कोयल मधुर संगीत सुनाती,मोर खुशी से नाचते है।।
छप्पर से पानी टपकता है ,फिर भी सब खुश हो जाते है।।
नदियां यौवन पर आती है,खलिहानों को छू जाती है।।
जैसे इस बारिश में हमको,तेरी भी याद सताती है।।
तुम आ जाओ इन बूंदों में,मेरे तन मन को भिगो जाओ।।
आ जाओ तुम फिर न जाओ,ऐसी बारिश बन आ जाओ।।
बरखा रानी तेरे आने से,रौनक प्रकृति में आती है।।
मेघा बरसे,तन मन हरषे, धरा हरित हो जाती है।।
मधु शुभम पाण्डे
शहीदों को नमन
💐🙏🏻शहीदों को नमन🙏🏻💐
सच्चा प्रेम था भारत माँ से, माँ का आँचल ओड़ चले।।
खुश रहना मेरे देश वासियों,वतन हवाले छोड़ चले।
मैया मेरी मत रोना तू, सदा तेरे आँचल में रहूंगा।।
हंस कर मुझको विदा करो माँ, अगले जनम तेरा लाल बनूँगा।।
देश भक्ति थी दिल में उनके, देश के लिए दम तोड़ चले।।
खुश रहना मेरे देशवासियों वतन हवाले छोड़ चले।।
वीरों की हर सांस सांस मे, बस देश प्रेम ही बसता है।।
बनके सर्प गद्दार यहाँ, अपने ही देश को डसता है।।
देश को बांधो एक सूत्र मे, हम अपने दिल जोड़ चले।।
खुश रहना मेरे देशवासियों वतन हवाले छोड़ चले।।
हिन्दू ,मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, है हम सब आपस मे भाई।।
छोड़ो देश से अब गद्दारी, मत फैलाओ घर में ही बुराई।।
देश है परिवार हमारा, यही सोच घर छोड़ चले।।
खुश रहना मेरे देशवासियों वतन हवाले छोड़ चले।।
सच्चा प्रेम था भारत माँ से, माँ का आँचल ओड़ चले।।
खुश रहना मेरे देशवासियों वतन हवाले छोड़ चले।।
🙏मधु शुभम पाण्डे🙏
सरिता
#सरिता
निर्मल सी बहती रहती हैं, जीवन की राह बताती हैं।।
कल कल की ध्वनि गुंजारित कर,मधुर संगीत सुनाती हैं।।
पर्वत का सीना चीर कर,स्वयं ही राह बनाती हैं।।
कठिन परिस्थितियों से लड़ना नदियां हमको सिखलाती हैं।।
दुर्गम हो राह चलना हो कठिन,फिर भी यह चलती जाती हैं।।
जीवन में आगे बढ़ते जाना, नदियां हमको सिखलाती हैं।।
संयम मत खोना अपना कभी,जब विपदा कोई आती हैं।।
हार न मानो विपदा से ,नदियां हमको सिखलाती हैं।।
अरबों मीलों चल चलकरके,सागर में वो मिल जाती है।।
अस्तित्व बनाये रखने की,सीख हमें दे जाती हैं।।
सफ़र हमेशा चलता रहे ,संघर्ष से हमें जिताती हैं।।
जीवन जीने की राह सदा ,नदियां हमको सिखलाती हैं।
🙏मधु शुभम पाण्डे🙏
ऋतुओं की रानी
♥️ऋतुओं की रानी वर्षा♥️
पावस ऋतु जब आती है,सर्वत्र हरीतिमा छाती है।।
खग कलरव है करते नभ में,भू आनंदित हो जाती है।।
मेघ सँवर कर आते है,मोती बूँदे बन जाती है।।
चलत बयार ऐसी सुखदायी,चहुँ और प्रसन्नता छाती है।।
मयूर करत मनभावन नर्तन, भ्रमर करत कुसुम पर गुंजन।।
हर्षित हो हम सब मिलकर,करते है पावस अभिनंदन।।
प्रियतम का स्मरण करती है,प्रियतमा बन प्यारी अवनि।।
गगन ने प्रेम उड़ेल दिया, सौंधी सी महकती है अवनि।।
नदियां कल कल कर बहती हैं,मानो कुछ हमसे कहती हैं।।
आती जाती उसकी लहरें,जीवन की गाथा कहती है।।
प्रकृति का मनोरम दृश्य,छटा अद्भुत निराली है।।
ऋतुओं की रानी वर्षा से सब जगह छाई हरियाली है।।
🙏मधु शुभम पाण्डे🙏
पनघट
घूंघट के पट से,पथिकन को देखत है।।
पिया के आने की, बाट जोहे जात है।।
जा नार-नवेली ,करत सखियन संग अठखेली।।
कबहुँ विचरत अकेली,चाल मतवाली चलत जात ।।
कंगना की खन-खन और पायल की छन-छन।।
वातावरण में ये हलचल सी करत जात।।
कुएं की उदासी को दूर करती चहल पहल।।
पनिहारिन पनघट पर अब न दिखात है।।
पथिक की पिपासा, कुएं ही मिटावत थे।।
कहाँ रहे पनघट,न पनिहारिन दिखात है।।
न कोनऊ गोपी दिखे, न ही दिखत राधिका।।
विचरत न कान्हा, न ही मटकी फोड़ी जात है।।
झटकत न चुनरी,न बहियां मरोड़त श्याम,
संस्कृति "बिसलरी" में सब विसरत जात है।।
🙏मधु शुभम पाण्डे🙏
हथनी की हत्या
इंसान अब तू सचमें हैवान हो गया है।।
तेरे अंदर का मानव , लग रहा खो गया है।।
मानवता को फिर से, शर्मसार कर दिया।।
गर्भवती माँ पे तूने , वार कर दिया।।
माँ की बेबसी का तूने,फायदा उठाया है।।
प्रलयकाल को स्वयं न्यौता दे बुलाया है।।
तू मानव ये सोच तेरे पास आयी थी।।
कुकृत्य करते तूने,क्यूँ न शर्म खायी थी।।
कितना तड़पी होगी, जब प्राण छोड़े होंगे।।
बच्चे को बचाने के कितने जतन जोड़े होंगे।।
इंसानियत से अब तो यक़ीन हट गया।।
तू सोच न तेरे सर से पाप छट गया।।
प्रकृति का कोप, तुझसे सहा न जाएगा।।
ईश्वर भी तेरे जुल्म,माफ़ कर न पायेगा।।
अब भोग तू प्रकोप,ये सृष्टि भी थम जाएगी।।
तेरी इस करनी का फल,सारी दुनिया पायेगी।।
🙏मधु शुभम पाण्डे🙏
सायंकाल
सायंकाल 💐
नभ में भानु छुप जाएगा,
अब शीतल सायंकाल आएगा,
पंछी लौट चले आशियाने की ओर,
शशि की शीतलता ,अब फैल रही चहुँ ओर,
साँझ हुई, नए सपनें सजे, निशा आगमन ले आयी है।।
दिनकर की तपन अब खत्म हुई,मौसम में ठंडक छायी है।।
🙏मधु शुभम पाण्डे🙏
अरुणोदय
💐अरुणोदय💐
स्वर्ण रश्मियां रथ बनकर,सुंदर प्रभात ले आयी।।
वसुधा पर फैले तिमिर को हर, पुष्पों का जीवन ले आयी।।
फैली नभ में चहुँ ओर ज्योति,संसार प्रकाशित हो आया।।
झूमें हो मगन मधुप कलियों पर,जैसे उनका नव जीवन आया।।
सौंदर्यवान हो उठी वसुंधरा, प्रकृति में है वात्सल्य छाया।।
रवि किरणें पड़ी पीयूष बूंदों पर ,धरती की लगती कंचन काया।।
नव प्रभात , नव दिवस, नई ऊर्जा का संचार करो।।
अरुणोदय का स्वागत कर , नए युग का निर्माण करो।।
🙏मधु शुभम पाण्डे🙏
स्वार्थी दुनिया
💐स्वारथ लाग करें सब प्रीति💐
अपने हजारों अवगुण छुपा लेंगे।।
दूसरों का खूब तमाशा बनाते है लोग।।
कब किसको कहाँ नीचा दिखा दें।।
हर समय ऐसी वजह ढूंढ़ते है लोग।।
गरीबों को देख गाड़ियों के शीशे लगा लेते है।।
आमदनी देख,यहाँ गले लगाते है लोग।।
जिसको सुनायी तुमने अपने हृदय की पीड़ा।।
सुनकर पीठ पीछे,हंसी उड़ाते है लोग।।
दूसरों के दुःख से जरा भी फर्क नहीं पड़ता।।
अपने दुखों का यहाँ शोक मनाते है लोग।।
कोई कद्र नही यहाँ किसी की भावनाओं की ।।
हैसियत देख रिश्ते निभाते है लोग।।
मतलबी युग में मतलब से सब अपने है।।
काम निकल जाने पर भूल जाते है लोग।।
परेशान देखकर किनारा काट लेते है।।
कामयाबी मिलने पर पास आने लगते है लोग।।
अपनी खुशियों का बस मूल्य होता है।।
समय निकल जाने पर बदल जाते है लोग।।
जरा सी तरक्की पर रिश्ते याद नही रहते।।
मंजिल पाकर माँ बाप को भी भूल जाते है लोग।।
पैसों के मद में निमग्न होकर।।
खून के रिश्ते भी यहाँ,तोड़ जाते है लोग।।
किसी की शान -ओ- शौकत से अंदाज़ा लगा लेते है।।
मुँह देखा व्यवहार यहाँ करते है लोग।।
🙏मधु शुभम पाण्डे🙏
बुंदेली हास्य व्यंग्य
हास्य व्यंग्य😀
समय की लेलो बलैयां
बीबी के पांव दबा रहे सइयां।।
भोर भोर उठके चाय बनावे,
सुबह को नास्ता और लंच भी बनावे।।
डिनर खो चढ़ रही करैयां,
बीबी के पांव दबा रहे सइंया।।
शॉपिंग करने खों मॉल लेके जावे,
अपने कंधन पे सबरो सामान उठावे,
घरबारी खों भी लै रहे कइंया,
बीबी के पांव दबा रहे सइंया।।
जिनकी बीबी सुनो करत है नौकरिया,
उनकी बीबी उन खों बना रही जोकरिया।।
थामे फिर रये बे उनकी बइंया,
बीबी के पांव दबा रहे सइंया।।
तुम्ही मेरी माता तुम्ही पिता हो,
तुम्ही मेरे बंधू सखा तुम्ही हो,
तुम्ही हो मेरी खिवैया,
बीबी के पांव दबा रहे सइयां।।
गीत
💞गीत💞
मेरे हमसफ़र इस दिल को तेरी तलाश है।।
तुझे खोजती निगाहें इन्हें तेरी ही प्यास है।।
जब तू मिलेगा मुझको करनी है सारी बातें।।
हो जाये तेरी रहमत तो करनी है कुछ मुलाकातें।।
दिल है उदास मेरा इसे तेरी ही आस है।।
तुझे खोजती निगाहे इन्हें तेरी ही प्यास है।।
मेरे सनम ओ हमदम, दिल की जुबां समझ ले।।
तू ही है मेरे दिल में ,अपना मुझे समझ ले।।
मेरे सभी अपनों में,तूही तो खास है।।
तुझे खोजती निगाहें इन्हें तेरी ही प्यास है।।
दिलदार यार प्यारे,अब तो मुझे समझ ले।।
तू है मेरी तमन्ना मुझे जिंदगी समझ ले।।
तेरे प्यार का एहसास ,दूर होके भी पास है।।
तुझे खोजती निगाहे इन्हें तेरी ही प्यास है।।
💐मधु शुभम पाण्डे💐
शरद ऋतु आगमन
शरद ऋतु आगमन-
मनभावन सी भोर लगे ,हो रहा शरद ऋतु आगमन।।
ऋतु शरद तुम्हारा अभिनन्दन है अभिनन्दन है अभिनन्दन।।
अवनि की छटा मनभावनी,ओस बूँदे मोती सी चमक रही।।
पुष्पों ने बिखेरी सुगन्ध, सारी ये धरती महक रही।।
भँवरे भी करते हैं गुंजन
ऋतु शरद तुम्हारा अभिनन्दन है अभिनन्दन है अभिनन्दन
शरद ऋतु का उजला चन्द्र, नभ में तारों संग खेल रहा,।।
वो मन्द मन्द मुस्कुरा,चांदनी अवनि पे उड़ेल रहा।।
चंदा-चकोरी का हुआ मिलन
ऋतु शरद तुम्हारा अभिनन्दन है अभिनन्दन है अभिनन्दन
पुष्पों पर सौंदर्य आया,चहुँ ओर फैली हरियाली।।
मन बावरा हो रहा ,छायी तन मन में खुशहाली।।
प्रकृति का आया नवयौवन
ऋतु शरद तुम्हारा अभिनन्दन है अभिनन्दन है अभिनन्दन।।
हल्की धूप, त्यौहारी धूम, आह्लादित है सबका ही मन।।
आओ मिल करें लक्ष्मी स्वागत, जो देती है हम सबको धन।।
ऋतु शरद तुम्हारा अभिनन्दन है अभिनन्दन है अभिनन्दन।।
मधु शुभम पाण्डे✍️✍️
बेटे
बिहारी जी
प्रीत है गहरी तुम संग प्रियतम, बढ़ती जाए हर पल हर छिन।। सगरी उमर मैं तुम पर हारूँ, चैन न आवे एक पल तुम बिन।। मधु शुभम पाण्डे✍️✍️
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ये सर्द रातें वो 5-6 साल के बच्चे फ़टे से कपड़ों में पूरा दिन इधर से उधर घूमते हैं ये सोचकर कि उन्हें कोई कुछ देदे, बहुत दुःख होता है ये सब द...
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#संकल्प आओ हम संकल्प ले अपने देश को फिर सोने की चिड़िया बनायेगे।। फिर से एक नया भारत बनायेगे।। न द्वेष हो न क्लेश हो।। हर बेटी में भारत म...
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अश्रुपूरित श्रद्धांजलि🙏🙏💐😥 माँ मैं इस दीवाली आऊंगा, नही पता था उस माँ को देश पे न्यौछावर जाएगा, दीवाली पर कुलदीपक उसका, तिरंगे में लिप...