संतो की नृशंस हत्या
सतयुग त्रेता द्वापर युग से इस युग मैं भी अब असुर हुए।।
पाप बढ रहा फिर धरती पर आ जाओ प्रभु धनुष लिए।।
1- न धर्म रहा न सत्य रहा, कलयुग की अब क्या बात कहे।।
है साधु संत अब नही सुरक्षित, मानव को सब असुर कहे।।
नही रहा जगत रहने लायक, छल कपट ने पाँव पसार दिए।।
पाप बढ रहा फिर धरती पर आ जाओ प्रभु धनुष लिए।।
2-संत गौ माता की हत्या, इंसानी असुरो की करनी है।।
डगमगा रहा है विश्व आज, कांप रही यह धरनी है।।
भव सागर मैं डोले नैया, संसार मे अब अन्याय जिये।।
पाप बढ़ रहा फिर धरती पर आ जाओ प्रभु धनुष लिए।।
3-तरकस से निकालो न्याय प्रभु, अब दुष्टो का संहार करो।।
जीवित करदो मानवता को,धरती मां का सब भार हरो।।
"मधु" हृदय रोये, हुए सजल नयन, बस एक आप की आस किए।।
पाप बढ़ रहा फिर धरती पर आ जाओ प्रभु धनुष लिए।।
मधु शुभम पाण्डे
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