Tuesday, November 10, 2020

संतों की हत्या

 संतो की नृशंस हत्या

सतयुग त्रेता द्वापर युग से इस युग मैं भी अब असुर हुए।।

पाप बढ रहा फिर धरती पर आ जाओ प्रभु धनुष लिए।।


1- न धर्म रहा न सत्य रहा, कलयुग की अब क्या बात कहे।।

है साधु  संत अब नही सुरक्षित, मानव को सब असुर कहे।।


नही रहा जगत रहने लायक, छल कपट ने पाँव पसार दिए।।

पाप बढ रहा फिर धरती पर आ जाओ प्रभु धनुष लिए।।



2-संत गौ माता की हत्या, इंसानी असुरो की करनी है।।

डगमगा रहा है विश्व आज, कांप रही यह धरनी है।।


भव सागर मैं डोले नैया, संसार मे अब अन्याय जिये।।

पाप बढ़ रहा फिर धरती पर आ जाओ प्रभु धनुष लिए।।




3-तरकस से निकालो न्याय प्रभु, अब दुष्टो का संहार करो।।

जीवित करदो मानवता को,धरती मां का सब भार हरो।।

"मधु" हृदय रोये, हुए सजल नयन, बस एक आप की आस किए।।


पाप बढ़ रहा फिर धरती पर आ जाओ प्रभु धनुष लिए।।


मधु शुभम पाण्डे

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बिहारी जी

 प्रीत है गहरी तुम संग प्रियतम, बढ़ती जाए हर पल हर छिन।। सगरी उमर मैं तुम पर हारूँ, चैन न आवे एक पल तुम बिन।। मधु शुभम पाण्डे✍️✍️