Saturday, November 7, 2020

कागज़ क़लम

 # कागज़ क़लम


जब क़लम चलती है शब्दों का भंडार उमड़ता है

और फिर प्रेम,वेदना,स्नेह,और न जाने कितनी अनकही बातें ,

 

किसी के हृदय की असीमित पीड़ा

तो किसी का उमड़ता बेहिसाब प्रेम 

सब उकेर देती है कोरे कागज़ पर


कागज़ के बिना क़लम अधूरी है और क़लम के बिना कागज़

कितना अटूट रिश्ता है कागज़ और क़लम का

बस ऐसे ही रिश्ते की तलाश होती है सभी को 

जो एक दूसरे के बिना अपूर्ण हो


मधु शुभम पाण्डे✍️✍️

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बिहारी जी

 प्रीत है गहरी तुम संग प्रियतम, बढ़ती जाए हर पल हर छिन।। सगरी उमर मैं तुम पर हारूँ, चैन न आवे एक पल तुम बिन।। मधु शुभम पाण्डे✍️✍️