💐अरुणोदय💐
स्वर्ण रश्मियां रथ बनकर,सुंदर प्रभात ले आयी।।
वसुधा पर फैले तिमिर को हर, पुष्पों का जीवन ले आयी।।
फैली नभ में चहुँ ओर ज्योति,संसार प्रकाशित हो आया।।
झूमें हो मगन मधुप कलियों पर,जैसे उनका नव जीवन आया।।
सौंदर्यवान हो उठी वसुंधरा, प्रकृति में है वात्सल्य छाया।।
रवि किरणें पड़ी पीयूष बूंदों पर ,धरती की लगती कंचन काया।।
नव प्रभात , नव दिवस, नई ऊर्जा का संचार करो।।
अरुणोदय का स्वागत कर , नए युग का निर्माण करो।।
🙏मधु शुभम पाण्डे🙏
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