भजन
भव से तारो हमें ओ कन्हैया,तेरे दर के पुजारी हुए है।।
भीख देदो प्रभु जी दरस की,दर्शन के भिखारी हुए है।।
1-हम है अज्ञानी,है छल प्रपंची,तुम हो सर्वज्ञ मेरे प्रभु जी।।
उलझे है मोह माया में इतने,हम गुनहगार तेरे प्रभु जी।।
विनय करते है कर जोड़ मोहन,जबसे सूरत निहारे हुए है।।
भीख दर्शन•••••••••••
2-उम्र मैने व्यसन में गुजारी, अंत में भी है माया निहारी,
अनगिनत पाप मैने है कीन्हे,न कभी पुण्य कीन्हे मुरारी,
अब बिसारो प्रभु मेरे अवगुण,अब तो तेरे सहारे हुए है।।
भीख••••••••••••••
3-करूँ हरिगान हर पल प्रभु मैं, ज्ञान चक्षु मुझे दो बिहारी,
रात दिन भक्तिरत ही रहूं मैं, ऐसी कृपा करो पालनहारी,
मेरे हृदय भक्ति जगा दो,दुनिया के सताए हुए है,
भीख••••••••••••
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