दीपोत्सव🪔
अंतःकरण में ज्योति जलाकर,घृणा द्वेष को दूर भगायें।।
प्रेम नाम की बाती डालकर,आओ सब दीवाली मनायें।।
हृदय से ईर्ष्या ऐसे निकालो जैसे घर से कूड़ा करकट।।
मन में इंसानियत जगाओ,हो जाये फिर घर में बरक़त।।
महल,अटारी,द्वार सजायें।।
आओ सब दीवाली मनायें।।
हर बेटी को लक्ष्मी समझो,वही तो सबकी दौलत है।।
झूठी शान पैसे से होती ये न सच्ची शौहरत है।।
दिलों में प्रेम के दीप जलायें।।
आओ सब दीवाली मनायें।।
माँ बेटी की आन बचाना,सबकी जिम्मेदारी है।।
लक्ष्मी मां आशीष दे सबको,ऐसी विनय हमारी है।।
आओ अब मानवता दिखायें।।
आओ सब दीवाली मनायें।।
अब न कोई निर्भया मरे,न किसी मासूम की माँ रोवे।।
करे कृत्य जो इतना घिनौना,सज़ा उसे फाँसी की होवे।।
कानून को अब कुछ तगड़ा बनायें।।
आओ सब दीवाली मनायें।।
मधु शुभम पाण्डे✍️✍️
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