😭😭😭😭
डरती है एक बेटी की माँ ,पैदा बेटी करने से।
हवस के भूखे हैवानों के, हाथ कुचलकर मरने से।
नन्ही नन्ही कलियों को, खिलने से पहले मसल दिए।
क्या दोष है नन्ही परियों का, जिनको पत्थर से कुचल दिए।
नौ महीने जिसने पेट में ढोया, वो बिलख बिलख कर रोती है।
छीन ली उसकी घर की रौनक, क्या बेटी इसलिए होती है।
मत ढोंग करो उसे दुर्गा मानकर, देवी पूजा करने का।
बस हक़ देदो उसे इस दुनियां में, निर्भय होकर जीने का।
मधु शुभम पाण्डे✍️
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