Saturday, November 7, 2020

बारिश

बारिश


देखो बरखा रानी आयी,गूँज उठी है शहनाई।।

नभ में काले मेघा छाये, धरती ने ली है अंगड़ाई।।


बूंदों की सरगोशी से ,मिट्टी सोंधी सी महक रही।।

फैली खुशहाली चारों ओर, पेड़ों पर चिड़िया चहक रही।।


सड़कें, राही, पेड़, परिंदे,गर्मी से बेहाल थे सब।।

फूलों की मुस्कान है लौटी,वर्षा के इंतज़ार में थे सब।।


आँगन के पानी में बच्चे, कागज की नाव चलाते है।।

पुए-पकौड़े खा खाकर,अन्नदाता खुशी मनाते हैं।।


कोयल मधुर संगीत सुनाती,मोर खुशी से नाचते है।।

छप्पर से पानी टपकता है ,फिर भी सब खुश हो जाते है।।


नदियां यौवन पर आती है,खलिहानों को छू जाती है।।

जैसे इस बारिश में हमको,तेरी भी याद सताती है।।


तुम आ जाओ इन बूंदों में,मेरे तन मन को भिगो जाओ।।

आ जाओ तुम फिर न जाओ,ऐसी बारिश बन आ जाओ।।


बरखा रानी तेरे आने से,रौनक प्रकृति में आती है।।

मेघा बरसे,तन मन हरषे, धरा हरित हो जाती है।।


मधु शुभम पाण्डे

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बिहारी जी

 प्रीत है गहरी तुम संग प्रियतम, बढ़ती जाए हर पल हर छिन।। सगरी उमर मैं तुम पर हारूँ, चैन न आवे एक पल तुम बिन।। मधु शुभम पाण्डे✍️✍️