लोह पुरुष-
देशभक्ति जिसकी रग रग में जगी थी।।
एकीकरण की मन में आस लगी थी।।
यथार्थ कर दिया तुमने, एकता का स्वपन।।
लोह पुरुष तुमको मेरा शत शत नमन।।
निर्भीक, धर्मवीर,ईमानदारी का भाव था।।
सिंह सी गर्जना थी,पर सरल स्वभाव था।।
किसानों के हक़ में किया जीवन यापन।।
लोह पुरुष तुमको मेरा शत शत नमन।।
आज़ादी के सेनानी,तुम गरीबों के सरदार थे।।
दुश्मन की कूटनीति पर करते तुम वार थे।।
नड़ियाद के वीर तुम हो भारतरतन।।
लोह पुरुष तुमको मेरा शत शत नमन।।
182मीटर "स्टेच्यू ऑफ यूनिटी" है।।
एकता की मूर्ति की अलग ही छवि है।।
साहित्य की ओर भी दिया तुमने अपना मन।।
लोह पुरुष तुमको मेरा शत शत नमन।।
मधु शुभम पाण्डे✍️
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