ये सर्द रातें वो 5-6 साल के बच्चे फ़टे से कपड़ों में पूरा दिन इधर से उधर घूमते हैं ये सोचकर कि उन्हें कोई कुछ देदे,
बहुत दुःख होता है ये सब देखकर खिलौने की उमर में उन्हें रोटी स्वयं कमानी होती है।। ऐसा क्यों होता है प्रभु।।
#फुटपाथ में बच्चे
खुला आसमां और बर्फ़ीली हवायें, वो मासूम खुले में कहीं भी सो जाते हैं।।
नहीं है पास उनके मख़मली बिछौने,न गर्म रजाई में वो खुद को छुपाते हैं।।
मिल जाता है उनको मां का आँचल, छुपकर उसी में वो रात गुजारते है।।
मिलता नही है उनको कई दिनों भोजन,भूख से उनके बदन चिपक जाते है।।
कहीं नुक्कड़ पर वो पैसे मांग लेते है,कई बार वहां से भी दुत्कारे जाते है।।
चालाकी नही मज़बूरी बन जाती है,भगाए जाने पर भी बार बार आते हैं।।
भोली सी सूरत न धुल पाती महीनों,सालों तक उनके न कपड़े बदल पाते है।।
विधाता उनकी तक़दीर संवार दे,जो तेरे दर पर भी भूखे सो जाते हैं।।
रोटी को बस मत तरसा किसी को मेरे दाता, हम एक अरज तेरे दर पे ये भी लगाते हैं।।
दुःखित होता है ये सब देखकर मन,चाहकर भी हम फिर भी कुछ न कर पाते हैं।।
बना दो मुझे ऐसा जो काम इनके आ जाऊं, इनको दूं मैं सारी खुशियां जो ये पाना चाहते हैं।।
मधु शुभम पाण्डे✍️✍️
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