Saturday, November 7, 2020

हथनी की हत्या


इंसान अब तू सचमें हैवान हो गया है।।

तेरे अंदर का मानव , लग रहा खो गया है।।


मानवता को फिर से, शर्मसार कर दिया।।

गर्भवती माँ पे तूने , वार कर दिया।।


माँ की बेबसी का तूने,फायदा उठाया है।।

प्रलयकाल को स्वयं न्यौता दे बुलाया है।।


तू मानव ये सोच तेरे पास आयी थी।।

कुकृत्य करते तूने,क्यूँ न शर्म खायी थी।।


कितना तड़पी होगी, जब प्राण छोड़े होंगे।। 

बच्चे को बचाने के कितने जतन जोड़े होंगे।।


इंसानियत से अब तो यक़ीन हट गया।।

तू सोच न तेरे सर से पाप छट गया।।


प्रकृति का कोप, तुझसे सहा न जाएगा।।

ईश्वर भी तेरे जुल्म,माफ़ कर न पायेगा।।


अब भोग तू प्रकोप,ये सृष्टि भी थम जाएगी।।

तेरी इस करनी का फल,सारी दुनिया पायेगी।।


🙏मधु शुभम पाण्डे🙏

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बिहारी जी

 प्रीत है गहरी तुम संग प्रियतम, बढ़ती जाए हर पल हर छिन।। सगरी उमर मैं तुम पर हारूँ, चैन न आवे एक पल तुम बिन।। मधु शुभम पाण्डे✍️✍️