इंसान अब तू सचमें हैवान हो गया है।।
तेरे अंदर का मानव , लग रहा खो गया है।।
मानवता को फिर से, शर्मसार कर दिया।।
गर्भवती माँ पे तूने , वार कर दिया।।
माँ की बेबसी का तूने,फायदा उठाया है।।
प्रलयकाल को स्वयं न्यौता दे बुलाया है।।
तू मानव ये सोच तेरे पास आयी थी।।
कुकृत्य करते तूने,क्यूँ न शर्म खायी थी।।
कितना तड़पी होगी, जब प्राण छोड़े होंगे।।
बच्चे को बचाने के कितने जतन जोड़े होंगे।।
इंसानियत से अब तो यक़ीन हट गया।।
तू सोच न तेरे सर से पाप छट गया।।
प्रकृति का कोप, तुझसे सहा न जाएगा।।
ईश्वर भी तेरे जुल्म,माफ़ कर न पायेगा।।
अब भोग तू प्रकोप,ये सृष्टि भी थम जाएगी।।
तेरी इस करनी का फल,सारी दुनिया पायेगी।।
🙏मधु शुभम पाण्डे🙏
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