सायंकाल 💐
नभ में भानु छुप जाएगा,
अब शीतल सायंकाल आएगा,
पंछी लौट चले आशियाने की ओर,
शशि की शीतलता ,अब फैल रही चहुँ ओर,
साँझ हुई, नए सपनें सजे, निशा आगमन ले आयी है।।
दिनकर की तपन अब खत्म हुई,मौसम में ठंडक छायी है।।
🙏मधु शुभम पाण्डे🙏
प्रीत है गहरी तुम संग प्रियतम, बढ़ती जाए हर पल हर छिन।। सगरी उमर मैं तुम पर हारूँ, चैन न आवे एक पल तुम बिन।। मधु शुभम पाण्डे✍️✍️
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