💐स्वारथ लाग करें सब प्रीति💐
अपने हजारों अवगुण छुपा लेंगे।।
दूसरों का खूब तमाशा बनाते है लोग।।
कब किसको कहाँ नीचा दिखा दें।।
हर समय ऐसी वजह ढूंढ़ते है लोग।।
गरीबों को देख गाड़ियों के शीशे लगा लेते है।।
आमदनी देख,यहाँ गले लगाते है लोग।।
जिसको सुनायी तुमने अपने हृदय की पीड़ा।।
सुनकर पीठ पीछे,हंसी उड़ाते है लोग।।
दूसरों के दुःख से जरा भी फर्क नहीं पड़ता।।
अपने दुखों का यहाँ शोक मनाते है लोग।।
कोई कद्र नही यहाँ किसी की भावनाओं की ।।
हैसियत देख रिश्ते निभाते है लोग।।
मतलबी युग में मतलब से सब अपने है।।
काम निकल जाने पर भूल जाते है लोग।।
परेशान देखकर किनारा काट लेते है।।
कामयाबी मिलने पर पास आने लगते है लोग।।
अपनी खुशियों का बस मूल्य होता है।।
समय निकल जाने पर बदल जाते है लोग।।
जरा सी तरक्की पर रिश्ते याद नही रहते।।
मंजिल पाकर माँ बाप को भी भूल जाते है लोग।।
पैसों के मद में निमग्न होकर।।
खून के रिश्ते भी यहाँ,तोड़ जाते है लोग।।
किसी की शान -ओ- शौकत से अंदाज़ा लगा लेते है।।
मुँह देखा व्यवहार यहाँ करते है लोग।।
🙏मधु शुभम पाण्डे🙏
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