Tuesday, November 10, 2020

कोरोना काल में मजदूर

💐"मजदूर"💐

सुकून मिलेगा मेरे गाँव में, यह सोच शहर से निकले है।। 
पैदल चल नाप ली है दूरी,पाँवों में छाले निकले है।।

छोटे बच्चे है उनके साथ,भूंखे प्यासे वो चलते है।।
पापा हम घर कब पहुंचेगे,थक जाते , फिर भी चलते है।।

नन्हे से पैर तपती धरती, दूरी से न घबराते है।।
 हम घर बैठे अकुलाते है, वो पैदल चलते जाते है।।

जो भी है पास मिल खाते है, न मिले तो भूंखे सोते है।।
मर गए है वो भूंखे प्यासे,अब बच्चे उनके रोते है।। 

क्या इनके लिए कोई विधि नही, अब सारे न्याय सोते है।। 
करता कोई भुगते कोई।।गेहूँ के संग घुन पिसते है।।

मधु शुभम पाण्डे🙏

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बिहारी जी

 प्रीत है गहरी तुम संग प्रियतम, बढ़ती जाए हर पल हर छिन।। सगरी उमर मैं तुम पर हारूँ, चैन न आवे एक पल तुम बिन।। मधु शुभम पाण्डे✍️✍️