प्रीत है गहरी तुम संग प्रियतम,
बढ़ती जाए हर पल हर छिन।।
सगरी उमर मैं तुम पर हारूँ,
चैन न आवे एक पल तुम बिन।।
मधु शुभम पाण्डे✍️✍️
Writer and House wife..
प्रीत है गहरी तुम संग प्रियतम,
बढ़ती जाए हर पल हर छिन।।
सगरी उमर मैं तुम पर हारूँ,
चैन न आवे एक पल तुम बिन।।
मधु शुभम पाण्डे✍️✍️
ये सर्द रातें वो 5-6 साल के बच्चे फ़टे से कपड़ों में पूरा दिन इधर से उधर घूमते हैं ये सोचकर कि उन्हें कोई कुछ देदे,
बहुत दुःख होता है ये सब देखकर खिलौने की उमर में उन्हें रोटी स्वयं कमानी होती है।। ऐसा क्यों होता है प्रभु।।
#फुटपाथ में बच्चे
खुला आसमां और बर्फ़ीली हवायें, वो मासूम खुले में कहीं भी सो जाते हैं।।
नहीं है पास उनके मख़मली बिछौने,न गर्म रजाई में वो खुद को छुपाते हैं।।
मिल जाता है उनको मां का आँचल, छुपकर उसी में वो रात गुजारते है।।
मिलता नही है उनको कई दिनों भोजन,भूख से उनके बदन चिपक जाते है।।
कहीं नुक्कड़ पर वो पैसे मांग लेते है,कई बार वहां से भी दुत्कारे जाते है।।
चालाकी नही मज़बूरी बन जाती है,भगाए जाने पर भी बार बार आते हैं।।
भोली सी सूरत न धुल पाती महीनों,सालों तक उनके न कपड़े बदल पाते है।।
विधाता उनकी तक़दीर संवार दे,जो तेरे दर पर भी भूखे सो जाते हैं।।
रोटी को बस मत तरसा किसी को मेरे दाता, हम एक अरज तेरे दर पे ये भी लगाते हैं।।
दुःखित होता है ये सब देखकर मन,चाहकर भी हम फिर भी कुछ न कर पाते हैं।।
बना दो मुझे ऐसा जो काम इनके आ जाऊं, इनको दूं मैं सारी खुशियां जो ये पाना चाहते हैं।।
मधु शुभम पाण्डे✍️✍️
विरहणी
जब से तुम संग प्रीत लगी है,अब न कुछ भी भाये जी।।
पिय से मिलन की आस लगी है,पिय को टेर बुलाओ जी।।
अखियां हैं दरसन की प्यासी,इनकी प्यास बुझाओ जी।।
पिय से मिलन की आस लगी है,पिय को टेर बुलाओ जी।।
जबसे खबर मिली आने की,जियरा चैन न पायो जी।।
नेह जुड़ा तुम से मेरे कान्हा,अब तो न तरसाओ जी।।
एक टक देखत राह तिहारी,ह्रदय देश में आओ जी।।।
पिय से मिलन की आस लगी है,पिय को टेर बुलाओ जी।।
रैना में आओगे प्रियतम,दिया जलाए बैठी हूं।।
फूलों के रस्ते न आना, ह्रदय बिछाये बैठी हूं।।
पलकों से ले जाऊँगी में,नैनो बीच समाओ जी।।
पिय के मिलन की आस लगी है,पिय को टेर बुलाओ जी।।
मधु शुभम पाण्डे✍️✍️
1-प्रेम तुमको भी है हमको ज्ञात हो रहा।।
स्नेह तन मन में अब मेरे व्याप्त हो रहा।।
नेह में हम तुम्हारे पिघलने लगे।।
प्रेम गहरा सा अब मुझको प्राप्त हो रहा।।
2-तुमने छुआ है जबसे खुद को भुला दिया।।
तेरी खुशबुओं में खुद को मिला दिया।।
अब मर भी जाऊं तो कोई गिला नही है।।
तेरी धड़कनों में खुद को जिला दिया।।
💞मधु शुभम पाण्डे💞
भजन
भव से तारो हमें ओ कन्हैया,तेरे दर के पुजारी हुए है।।
भीख देदो प्रभु जी दरस की,दर्शन के भिखारी हुए है।।
1-हम है अज्ञानी,है छल प्रपंची,तुम हो सर्वज्ञ मेरे प्रभु जी।।
उलझे है मोह माया में इतने,हम गुनहगार तेरे प्रभु जी।।
विनय करते है कर जोड़ मोहन,जबसे सूरत निहारे हुए है।।
भीख दर्शन•••••••••••
2-उम्र मैने व्यसन में गुजारी, अंत में भी है माया निहारी,
अनगिनत पाप मैने है कीन्हे,न कभी पुण्य कीन्हे मुरारी,
अब बिसारो प्रभु मेरे अवगुण,अब तो तेरे सहारे हुए है।।
भीख••••••••••••••
3-करूँ हरिगान हर पल प्रभु मैं, ज्ञान चक्षु मुझे दो बिहारी,
रात दिन भक्तिरत ही रहूं मैं, ऐसी कृपा करो पालनहारी,
मेरे हृदय भक्ति जगा दो,दुनिया के सताए हुए है,
भीख••••••••••••
प्रीत है गहरी तुम संग प्रियतम, बढ़ती जाए हर पल हर छिन।। सगरी उमर मैं तुम पर हारूँ, चैन न आवे एक पल तुम बिन।। मधु शुभम पाण्डे✍️✍️