विरहणी
जब से तुम संग प्रीत लगी है,अब न कुछ भी भाये जी।।
पिय से मिलन की आस लगी है,पिय को टेर बुलाओ जी।।
अखियां हैं दरसन की प्यासी,इनकी प्यास बुझाओ जी।।
पिय से मिलन की आस लगी है,पिय को टेर बुलाओ जी।।
जबसे खबर मिली आने की,जियरा चैन न पायो जी।।
नेह जुड़ा तुम से मेरे कान्हा,अब तो न तरसाओ जी।।
एक टक देखत राह तिहारी,ह्रदय देश में आओ जी।।।
पिय से मिलन की आस लगी है,पिय को टेर बुलाओ जी।।
रैना में आओगे प्रियतम,दिया जलाए बैठी हूं।।
फूलों के रस्ते न आना, ह्रदय बिछाये बैठी हूं।।
पलकों से ले जाऊँगी में,नैनो बीच समाओ जी।।
पिय के मिलन की आस लगी है,पिय को टेर बुलाओ जी।।
मधु शुभम पाण्डे✍️✍️
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