शरद ऋतु आगमन-
मनभावन सी भोर लगे ,हो रहा शरद ऋतु आगमन।।
ऋतु शरद तुम्हारा अभिनन्दन है अभिनन्दन है अभिनन्दन।।
अवनि की छटा मनभावनी,ओस बूँदे मोती सी चमक रही।।
पुष्पों ने बिखेरी सुगन्ध, सारी ये धरती महक रही।।
भँवरे भी करते हैं गुंजन
ऋतु शरद तुम्हारा अभिनन्दन है अभिनन्दन है अभिनन्दन
शरद ऋतु का उजला चन्द्र, नभ में तारों संग खेल रहा,।।
वो मन्द मन्द मुस्कुरा,चांदनी अवनि पे उड़ेल रहा।।
चंदा-चकोरी का हुआ मिलन
ऋतु शरद तुम्हारा अभिनन्दन है अभिनन्दन है अभिनन्दन
पुष्पों पर सौंदर्य आया,चहुँ ओर फैली हरियाली।।
मन बावरा हो रहा ,छायी तन मन में खुशहाली।।
प्रकृति का आया नवयौवन
ऋतु शरद तुम्हारा अभिनन्दन है अभिनन्दन है अभिनन्दन।।
हल्की धूप, त्यौहारी धूम, आह्लादित है सबका ही मन।।
आओ मिल करें लक्ष्मी स्वागत, जो देती है हम सबको धन।।
ऋतु शरद तुम्हारा अभिनन्दन है अभिनन्दन है अभिनन्दन।।
मधु शुभम पाण्डे✍️✍️
You are great person...
ReplyDeleteआपकी सभी रचनाएँ बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण रचना हैं। ।💕💕
Radhe radhe
ReplyDeleteApki Sabhi rachna man ko chhu jati h