Tuesday, December 22, 2020

बिहारी जी

 प्रीत है गहरी तुम संग प्रियतम,

बढ़ती जाए हर पल हर छिन।।

सगरी उमर मैं तुम पर हारूँ,

चैन न आवे एक पल तुम बिन।।

मधु शुभम पाण्डे✍️✍️

Saturday, December 19, 2020

बच्चे

 ये सर्द रातें वो 5-6 साल के बच्चे फ़टे से कपड़ों में पूरा दिन इधर से उधर घूमते हैं ये सोचकर कि उन्हें कोई कुछ देदे,

बहुत दुःख होता है ये सब देखकर  खिलौने की उमर में उन्हें रोटी स्वयं कमानी होती है।। ऐसा क्यों होता है प्रभु।।


#फुटपाथ में बच्चे


खुला आसमां और बर्फ़ीली हवायें, वो मासूम खुले में कहीं भी सो जाते हैं।।


नहीं है पास उनके मख़मली बिछौने,न गर्म रजाई में वो खुद को छुपाते हैं।।


मिल जाता है उनको मां का आँचल, छुपकर उसी में वो रात गुजारते है।।


मिलता नही है उनको कई दिनों भोजन,भूख से उनके बदन चिपक जाते है।।


कहीं नुक्कड़ पर वो पैसे मांग लेते है,कई बार वहां से भी दुत्कारे जाते है।।


चालाकी नही मज़बूरी बन जाती है,भगाए जाने पर भी बार बार आते हैं।।



भोली सी सूरत न धुल पाती महीनों,सालों तक उनके न कपड़े बदल पाते है।।



विधाता उनकी तक़दीर संवार दे,जो तेरे दर पर भी भूखे सो जाते हैं।।


रोटी को बस मत तरसा किसी को मेरे दाता, हम एक अरज तेरे दर पे ये भी लगाते हैं।।


दुःखित होता है ये सब देखकर मन,चाहकर भी हम फिर भी कुछ न कर पाते हैं।।


बना दो मुझे ऐसा जो काम इनके आ जाऊं, इनको दूं मैं सारी खुशियां जो ये पाना चाहते हैं।।


मधु शुभम पाण्डे✍️✍️

विरहणी

विरहणी


जब से तुम संग प्रीत लगी है,अब न कुछ भी भाये जी।।

पिय से मिलन की आस लगी है,पिय को टेर बुलाओ जी।।


अखियां हैं दरसन की प्यासी,इनकी प्यास बुझाओ जी।।

पिय से मिलन की आस लगी है,पिय को टेर बुलाओ जी।।


जबसे खबर मिली आने की,जियरा चैन न पायो जी।।

नेह जुड़ा तुम से मेरे कान्हा,अब तो न तरसाओ जी।।

एक टक देखत राह तिहारी,ह्रदय देश में आओ जी।।।

पिय से मिलन की आस लगी है,पिय को टेर बुलाओ जी।।


रैना में आओगे प्रियतम,दिया जलाए बैठी हूं।।

फूलों के रस्ते न आना, ह्रदय बिछाये बैठी हूं।।

पलकों से ले जाऊँगी में,नैनो बीच समाओ जी।।

पिय के मिलन की आस लगी है,पिय को टेर बुलाओ जी।।


मधु शुभम पाण्डे✍️✍️

बिहारी जी

 प्रीत है गहरी तुम संग प्रियतम, बढ़ती जाए हर पल हर छिन।। सगरी उमर मैं तुम पर हारूँ, चैन न आवे एक पल तुम बिन।। मधु शुभम पाण्डे✍️✍️