Monday, October 12, 2020

गृहणियां


सबके लिए तुम हरपल हर लम्हा जीती हो।।
खुद के लिए कुछ पल तुम जी लिया करो।।

सबकी खुशियों की तुम रोज परवाह करती हो।।
अपने लिए खुल कर कभी मुस्कुरा लिया करो।।

नही है यहां किसी को तुम्हारे सपनों की परवाह।।
हक़ से कुछ सुनहरे सपने सजा  लिया करो।।

लगे जब भी तुम्हे तुम कैद हो जिम्मेदारियों में।।
खुले आसमां में बांहे फैला तुम झूम लिया करो।।

तुम्हारे बिन अधूरी है ये दुनियां ये क़ायनात,
कभी कभी खुद पर ग़ुरूर कर लिया करो।।

नही हो तुम आम न खुद को कम समझो,
रिश्तों से परे स्त्री की ताकत को आंक लिया करो।।

तुम चाहो तो पलट दो पल में सारी क़ायनात,
ख़ुद को कभी दुर्गा,लक्ष्मी समझ लिया करो।।

स्वयं को कमज़ोर लाचार अबला न समझो,
गलत का मुँह तोड़ जबाब दे दिया करो।।

मधु शुभम पाण्डे✍️✍️

Saturday, October 10, 2020

हत्या

 #हत्या


क्यों खून नही है खौल रहा ,सत्ता के ठेकेदारों का।।

शीश काटकर ले आओ ,उस ब्राह्मण के हत्यारों का।।


अधर्म से अपनी मृत्यु को, न्यौता दे देकर बुला लिए।।

क्या दोष था उस ब्राह्मण का, जिसको तुम जिंदा जला दिए।।


करवाओ न्याय दिलवाओ न्याय,निर्णय होगा अंगारों का।।

शीश काटकर ले आओ ,उस ब्राह्मण के हत्यारों का।।


"विनाशकाले विपरीत बुद्धि" कथन सत्य होता प्रतीत।।

जो जानना हो हत्या का श्राप,पढलो जाकर पूरा अतीत।।


पढ़ो वेद और गीता ,पुराण,करो प्राप्त ज्ञान संस्कारों का।।

शीश काटकर ले आओ, उस ब्राह्मण के हत्यारों का।।


मधु शुभम पाण्डे✍️✍️

#Hatya #poetry

बिहारी जी

 प्रीत है गहरी तुम संग प्रियतम, बढ़ती जाए हर पल हर छिन।। सगरी उमर मैं तुम पर हारूँ, चैन न आवे एक पल तुम बिन।। मधु शुभम पाण्डे✍️✍️